धत् तेरे की !भूल गयी रे ,फिर से भूल गयी मैं आज !
खूब कहा था माँ ने मुझसे, आज सवेरे समझा कर।
भैया का है आज जनम दिन, जाना है हम सबको मंदिर।
पापा जब आयें ऑफिस से, होगी पार्टी घर के अंदर।
दादी नानी सब आयेंगे ,चाचा चाची भी होंगे।
मेरे सारे दोस्त वहाँ पर, इंतज़ार करते होंगे।
मुझ बुद्धू को तो लेकिन ,कुछ भी नहीं है रहता याद।
धत तेरे की !भूल गयी रे!फिर से भूल गयी मैं आज ।।
(अनुराग,अर्णिमा, श्रेयांश और जिनिशा के लिए सस्नेह। )

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