जिद्दी हूँ मैं जिद पे अड़ी हूँ मै
पहले तुम मानो अपनी गलती
कब से खड़ी हूँ मैं ।
सोचो ,सोचो और सोचो
बातों के उस छोर पे पहुंचो
शुरू हुई थी जहाँ कहानी
तुम भी अपनी धुन के पक्के
मैं भी अपनी हार न मानी
अभी तुम्हें कुछ वक्त लगेगा
वक्त ये थोड़ा सख्त लगेगा
पर फिर तुम सब कुछ जानोगे
सही हूँ मैं ये मानोगे ।
तब तक लेकिन चलते रहना
काम सभी तुम करते रहना
फिर दिन ऐसा आएगा
जीवन सरल हो जाएगा
न तुम होगे अब के जैसे
न मैं हूँगी पहले जैसी
झगड़ा सब मिट जाएगा
जीवन प्रेम सिखाएगा ।