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Tuesday, 14 October 2025

जीवन प्रेम सिखाएगा

जिद्दी हूँ मैं जिद पे अड़ी हूँ मै 
पहले तुम मानो अपनी गलती
कब से खड़ी हूँ मैं ।
सोचो ,सोचो और सोचो
बातों के उस छोर पे पहुंचो
शुरू हुई थी जहाँ कहानी
तुम भी अपनी धुन के पक्के 
मैं भी अपनी हार न मानी
अभी तुम्हें कुछ वक्त लगेगा
वक्त ये थोड़ा सख्त लगेगा
पर फिर तुम सब कुछ जानोगे
सही हूँ मैं ये मानोगे । 
तब तक लेकिन चलते रहना
काम सभी तुम करते रहना
फिर दिन ऐसा आएगा
जीवन सरल हो जाएगा
न तुम होगे अब के जैसे
न मैं हूँगी पहले जैसी
झगड़ा सब मिट जाएगा
जीवन प्रेम सिखाएगा । 

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